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Monday, 8 July 2013

64 लाख का टिकट, या 77 साल का सूखा

भारत की पिंकी ने विम्बलंडन में टॉस किया, एंडी मरे ने नोवाक जोकोविक को हरा कर खिताब जीता। विंबलडन के इतिहास में खुद को दर्ज करा कर एंडी मरे ने ब्रिटेन का नाम दुनिया में विश्व विख्यात कर दिया। 77 साल के बाद एंडी मरे ने खेल के शब्दों में कहे विंबलडन का खिताब जीत सूखा ख़त्म कर दिया। 

इस बार के विंबलडन टूर्नामेंट के दौरान कई अचरज में डालने वाली घटनाये भी घटी। 1936 में ब्रिटिस फ्रेड पेरी ने खिताब जीतकर अपनी हैट्रिक बनाई थी। विंबलडन के इतिहास में फ्रेड पेरी की 1936 में हुई जीत ब्रिटेन की 35 वी जीत थी। वहीँ, 136 साल के विंबलडन के इतिहास में एंडी मरे ने विंबलडन का 36 वां खिताब 77 साल बाद ब्रिटेन को दिलाकर देश को झूमने की वजह दे दी| 

1877 में शुरू हुये विंबलडन टूर्नामेंट में पहले कोई बाहरी देश नहीं खेलता था, सिर्फ ब्रिटेन और उसके उपनिवेश के खिलाड़ी ही इस प्रतियोगिता में भाग लेते थे। 1877 से 1906 तक ब्रिटेन ने इस खिताब को 30 बार जीता। 1907 में ब्रिटिश उपनिवेश आस्ट्रेलिया के खिलाडी नार्मन ब्रुक्स ने ब्रिटेन के टेनिस खिलाड़ियों का वर्चस्व तोड़ते हुए खिताब पर कब्ज़ा किया। 

1908-09 में फिर ब्रिटेन ने विंबलडन का खिताब अपने नाम किया। 1910 से लेकर 1933 तक विश्व के अलग अलग देशों के खिलाड़ी इस प्रतियोगिता को जीतते रहे। ब्रिटेन में होने वाल इस विश्वप्रसिद्द प्रतियोगिता का खिताब पाने के लिए ब्रिटेन को 24 सालों का लम्बा इंतज़ार करना पड़ा जब उनके खिलाड़ी फ्रेड पेरी ने जर्मनी के गाटफ्रेड वान क्रेम को लगातार तीन साल हराकर ब्रिटेन को विंबलडन चैम्पियन बनाया। 

फ्रेड पेरी के बाद तो ब्रिटेन के लिए विंबलडन जैसे सपना हो गया उसके खिलाड़ी सेमीफाइनल और फाइनल में पहुँचने का भी सपना नहीं देखते राउंड में ही हारकर अपने घरो की राह पकड़ते| वहीँ, विदेशी खिलाड़ी ब्रिटिश धरती पर आते और उन्ही के दर्शकों के सामने ब्रिटिश धरती और उनके खिलाड़ियों को रौंदते हुए कप जीतकर अगले साल का वादा कर चले जाते। 

लेकिन 2012 में एंडी मरे ने स्थिति को बदल दिया और फाइनल तक जा पहुंचे लेकिन टेनिस लिजेंड बन चुके रोज़र फेडरर के हाथ उन्हें हार का सामना करना पडा। 2013 के विम्बलंडन की शुरुवात ही उलटफेर वाली रही जब सभी दिग्गज खिलाड़ी हार कर बाहर होते रहे वहीँ, ब्रिटिश एंडी मरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे और फाइनल में जा पहुंचे|

एंडी मरे ने 1936 के बाद फ्रेड पेरी के खिताब जीतने के 77 सालों बाद ब्रिटेन के लिए विंबलडन का खिताब सर्बियाई खिलाड़ी नोवान जोकोविच को हराकर जीत लिया और अपना और ब्रिटेन का नाम विंबलडन इतिहास में दर्ज करा लिया| एंडी मरे की इस जीत ने उन ब्रिटिश खिलाड़ियों का मेंटल ब्लाक भी खोल दिया की ब्रिटेन विंबलडन का खिताब नहीं जीत सकता। विंबलडन में ब्रिटेन ने अपना 36 वाँ खिताब जीता है। 

विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर पहुंचे दर्शको ने भले ही टिकट के लिए 64 लाख रुपये तक खर्च किये लेकिन इतिहास बनते देखना किसे अच्छा नहीं लगता उसके आगे पैसों की क्या मोल है। जिस खिताब को पाने के लिए ब्रिटेन की करीब तीन पीढ़िया तरस रही थी आज वो खिताब उनके पास है।

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