उत्तर प्रदेश के कन्नौज की सांसद भले ही एक कद्दावर महिला हैं, लेकिन इस क्षेत्र में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी में पिछड़ेपन का नमूना मनरेगा जैसी योजना में महिलाओं की हिस्सेदारी देखने से मिल जाता है।
अखिलेश सरकार में कन्नौज पर मेहरबानी किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश स्वयं कन्नौज के सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में उनकी पत्नी डिंपल यादव कन्नौज की सांसद हैं। क्षेत्र में मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी नाममात्र की है।
ऐसा नहीं है कि इस बात की भनक आलाधिकारियों को नहीं है। शासन स्तर पर होने वाली हर समीक्षा बैठक में महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत नहीं बढ़ने पर मातहतों को फटकार लगाई जाती है। इसके बाद भी मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ रही है।
कन्नौज में महात्मा गांधी रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा) की शुरुआत अप्रैल 2008 में हुई थी। तबसे आज तक प्रशासनिक तंत्र बराबर महिलाओं को अधिक संख्या में इससे जोड़ने का प्रयास कर रहा है। लेकिन, अभी तक महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने का कोई कारगर उपाय नहीं खोजा जा सका है।
जिले की आबादी 16,58,005 है। इसमें महिलाओं की आबादी 7,75,459 है। प्रशासन अभी तक महज तीन फीसदी महिलाओं को मनरेगा से जोड़ने में कामयाब हो सका है। यह हाल तब है जब रोजगार के मामले में मनरेगा को सबसे बेहतर माना जाता है और इसमें महिलाओं को तमाम तरह की सहुलियतें भी दी जाती हैं।
मनरेगा से जनपदों में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के विकास कार्य होते हैं। नियम के मुताबिक काम मांगने वाले हर महिला-पुरुष को कार्य दिया जाना है और मांगने के 15 दिन के अंदर काम उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में श्रमिक को उस अवधि का भत्ता दिए जाने की व्यवस्था है।
भत्ते के मामले में भी कन्नौज बेहद खास है क्योंकि अभी तक जिले में किसी को भी भत्ता नहीं दिया गया है। कागजों की जादूगरी में माहिर रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान व तकनीकी सहायकों की हर रिपोर्ट ओके रहती है।
अखिलेश सरकार में कन्नौज पर मेहरबानी किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश स्वयं कन्नौज के सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में उनकी पत्नी डिंपल यादव कन्नौज की सांसद हैं। क्षेत्र में मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी नाममात्र की है।
ऐसा नहीं है कि इस बात की भनक आलाधिकारियों को नहीं है। शासन स्तर पर होने वाली हर समीक्षा बैठक में महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत नहीं बढ़ने पर मातहतों को फटकार लगाई जाती है। इसके बाद भी मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ रही है।
कन्नौज में महात्मा गांधी रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा) की शुरुआत अप्रैल 2008 में हुई थी। तबसे आज तक प्रशासनिक तंत्र बराबर महिलाओं को अधिक संख्या में इससे जोड़ने का प्रयास कर रहा है। लेकिन, अभी तक महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने का कोई कारगर उपाय नहीं खोजा जा सका है।
जिले की आबादी 16,58,005 है। इसमें महिलाओं की आबादी 7,75,459 है। प्रशासन अभी तक महज तीन फीसदी महिलाओं को मनरेगा से जोड़ने में कामयाब हो सका है। यह हाल तब है जब रोजगार के मामले में मनरेगा को सबसे बेहतर माना जाता है और इसमें महिलाओं को तमाम तरह की सहुलियतें भी दी जाती हैं।
मनरेगा से जनपदों में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के विकास कार्य होते हैं। नियम के मुताबिक काम मांगने वाले हर महिला-पुरुष को कार्य दिया जाना है और मांगने के 15 दिन के अंदर काम उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में श्रमिक को उस अवधि का भत्ता दिए जाने की व्यवस्था है।
भत्ते के मामले में भी कन्नौज बेहद खास है क्योंकि अभी तक जिले में किसी को भी भत्ता नहीं दिया गया है। कागजों की जादूगरी में माहिर रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान व तकनीकी सहायकों की हर रिपोर्ट ओके रहती है।

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