इशरत जहां एन्काउन्टर मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके करीबी मंत्री अमित शाह की मुश्किलें 4 जुलाई तक बढ़ी हुई है| उधर सीबीआई सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के मुताबिक सीबीआई हाई कोर्ट में विभाग को किरकिरी से बचाने के लिए मोदी , अमित शाह और पूर्व संयुक्त निदेशक आई बी राजिन्द्र कुमार का नाम चार्जशीट से निकालने पर विचार कर रही है|
सीबीआई इस मामले में बैकफुट पर आ चुकी है| उधर आईबी के पूर्व निदेशक और गुजरात पुलिस द्वारा दिए गए बयानों ने सीबीआई को और उलझा दिया है| 15 जून 2004 को आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक राजिन्द्र कुमार ने अपनी अहमदाबाद तैनाती के दौरान गुजरात पुलिस को पाक समर्थित लश्करे- तैय्यबा के एक महिला सहित पांच आतंकवादियों को गुजरात में प्रवेश की जानकारी दी थी, जिन्हें बाद में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था| वहीँ, गुजरात पुलिस राजिन्द्र कुमार के बयान से अलग बयान दे रही है, गुजरात पुलिस का दावा है कि इन आतंकियों को गुजरात पुलिस ने पकड़ा था, आईबी सिर्फ पूछताछ करने आई थी उसके बाद इन्हें ले जाकर अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एन्काउन्टर कर दिया गया|
सीबीआई गुजरात पुलिस के उस बयान को पहले आधार बनाना चाहती थी जिसमें पूर्व DIG डी जी बंजारा और आईबी संयुक्त निदेशक पर बातचीत हुई थी जिसमें सफ़ेद और काली दाढ़ी वालों से बातचीत होने की बात सामने आई थी| बंजारा और कुमार के बीच हुई इस बातचीत में काली और सफ़ेद दाढ़ी वालों से इजाजत मिलने की बात कही गई थी|
इसी एन्काउन्टर के दौरान वायरलेस पर कुछ पुलिस वालों ने काली और सफ़ेद दाढ़ी वालों से बात हो गई है जैसे शब्द सुने थे| सीबीआई इस एक बयान के आधार पर मोदी और शाह का नाम चार्जशीट में डालने जा रही है लेकिन सीबीआई को अच्छी तरह से पता है कि सुनी हुई बातों पर कोर्ट यकीन नहीं करती| सीबीआई कि इस मुश्किल को आसान किया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और पूर्व गृह सचिव आर के सिंह ने| इन दोनों कि सलाह पर अब सीबीआई इस चार्जशीट से मोदी और शाह का नाम चार्जशीट से बाहर करने पर विचार कर रही है|
सीबीआई इस मामले में बैकफुट पर आ चुकी है| उधर आईबी के पूर्व निदेशक और गुजरात पुलिस द्वारा दिए गए बयानों ने सीबीआई को और उलझा दिया है| 15 जून 2004 को आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक राजिन्द्र कुमार ने अपनी अहमदाबाद तैनाती के दौरान गुजरात पुलिस को पाक समर्थित लश्करे- तैय्यबा के एक महिला सहित पांच आतंकवादियों को गुजरात में प्रवेश की जानकारी दी थी, जिन्हें बाद में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था| वहीँ, गुजरात पुलिस राजिन्द्र कुमार के बयान से अलग बयान दे रही है, गुजरात पुलिस का दावा है कि इन आतंकियों को गुजरात पुलिस ने पकड़ा था, आईबी सिर्फ पूछताछ करने आई थी उसके बाद इन्हें ले जाकर अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एन्काउन्टर कर दिया गया|
सीबीआई गुजरात पुलिस के उस बयान को पहले आधार बनाना चाहती थी जिसमें पूर्व DIG डी जी बंजारा और आईबी संयुक्त निदेशक पर बातचीत हुई थी जिसमें सफ़ेद और काली दाढ़ी वालों से बातचीत होने की बात सामने आई थी| बंजारा और कुमार के बीच हुई इस बातचीत में काली और सफ़ेद दाढ़ी वालों से इजाजत मिलने की बात कही गई थी|
इसी एन्काउन्टर के दौरान वायरलेस पर कुछ पुलिस वालों ने काली और सफ़ेद दाढ़ी वालों से बात हो गई है जैसे शब्द सुने थे| सीबीआई इस एक बयान के आधार पर मोदी और शाह का नाम चार्जशीट में डालने जा रही है लेकिन सीबीआई को अच्छी तरह से पता है कि सुनी हुई बातों पर कोर्ट यकीन नहीं करती| सीबीआई कि इस मुश्किल को आसान किया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और पूर्व गृह सचिव आर के सिंह ने| इन दोनों कि सलाह पर अब सीबीआई इस चार्जशीट से मोदी और शाह का नाम चार्जशीट से बाहर करने पर विचार कर रही है|

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