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Tuesday, 9 July 2013

संगठन है अधूरा तो कील काँटा किसका दुरुस्त करेंगे शाह

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में संगठन का कील-कांटा दुरुस्त करने में जुट गए हैं। शाह का दावा है कि केंद्र में अगली राजग सरकार की नींव उप्र से ही पड़ेगी, लेकिन सवाल यह है कि आधे-अधूरे संगठन के साथ उनके बूथ स्तर तक पहुंचने और केंद्र की सत्ता में अपनी पार्टी को लाने का सपना वह कैसे पूरा करेंगे। 

लक्ष्मीकांत वाजपेयी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बने एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन वह अपनी पूरी टीम अभी भी नहीं खड़ी कर पाए हैं। उपाध्यक्ष के दो पद अभी भी खाली हैं। मतलब, पार्टी के संविधान के मुताबिक जितने पद भरे जाने चाहिए उतने भी वह भरने में कामयाब नहीं हुए हैं।

वाजपेयी ने काफी जद्दोजहद के बाद मोर्चा प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी, लेकिन भाजपा की रीढ़ मानी जाने वाली युवा इकाई भाजयुमो की प्रदेश कार्य समिति की घोषणा का पेंच वह अभी तक नहीं सुलझा पाए हैं। भाजपा के एक पदाधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "उप्र में पार्टी दोराहे पर खड़ी है। एक तरफ तो शाह बूथ स्तर तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं, दूसरी ओर प्रदेश स्तर पर अभी कई पद खाली पड़े हुए हैं, उन्हें भरने की चिंता किसी को नहीं है।"

पार्टी पदाधिकारी बताते हैं कि अमित शाह लगभग पिछले एक महीने से प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र से लेकर पूर्वाचल के गोरखपुर तक अलग-अलग बैठक कर कार्यकर्ताओं को नसीहत दे चुके हैं कि उन्हें बूथ स्तर तक पहुंच बनाने की जरूरत है। बकौल पदाधिकारी, उपाध्यक्ष के दो पद अभी भी खाली हैं, अभी तक क्यों नहीं भरे गए यह अहम सवाल है। इस पदाधिकारी ने बताया कि उपाध्यक्ष के दो पद इसीलिए खाली पड़े हैं क्योंकि उसको लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है।

भाजयुमो पदाधिकारियों की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष राय ने कहा कि कार्य समिति के गठन का काम अंतिम चरण में है, तथा जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। प्रदेश में खाली पड़े उपाध्यक्ष के दो रिक्त पदों के बारे में पूछे जाने पर प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा, दो पद खाली हैं लेकिन जल्द ही इनको भी भर लिया जाएगा। शाह संगठन के स्तर पर इन चुनौतियों से कैसे निबटेंगे, और कमजोर संगठन के जरिए अपने बूथों तक पहुंचने के लक्ष्य को कैसे प्राप्त कर पाएंगें, देखने वाली बात होगी।

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