2005 में जब तात्कालिक उपमुख्यमंत्री आर आर पाटिल ने महाराष्ट्र के सभी डांस बार को बंद करने के आदेश दिए थे तो उनके कलम से निकला वो आदेश कई घरों के चूल्हे बुझाने के साथ उन अबोध लड़कियों को नई ज़िन्दगी देने वाला साबित हुआ। 2005 में जब आर आर पाटिल ने डांस बार बंद करने के आदेश दिये थे तब मुंबई से जाने वाली रेलगाड़ियों के सभी डिब्बों में इन बार बालाओं की संख्या सबसे ज्यादा हुआ करती थी।
बार बालाओ की रेलगाड़ियों ने इनको उन जगहों पर पहुंचा दिया जहां जाने का सपना इन्होने कभी देखा नहीं होगा। मुम्बई के डांस बार की चमक दमक वाली दुनिया से मेलों में डांस ग्रुप के साथ परफार्म करना इनकी नियत बन गई। पेट की आग बुझाने के लिए इन बार बालाओं ने अपने जिस्म की नुमाइश करने में भी कोताही नहीं बरती।
2005 में डांस बार बंद होने के बाद इनके सामने रोज़ी रोटी का संकट पैदा हुआ, सरकारी फरमान ने इन हज़ारों बार बालाओं में से कुछ को जिस्म फरोशी के धंधे में भी धकेल दिया था। मुम्बई से निकाले जाने के बाद इन्होने पूर्वी भारत और उत्तरी भारत में रोज़ी रोटी कमाने के लिए रूख किया। वही कुछ कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में शिफ्ट हो गई।
अगस्त 2005 में बाम्बे पुलिस (संशोधन) एक्ट 2005 के तहत सरकार ने मुम्बई शहर के करीब 700 डांस बार और महाराष्ट्र के अलग अलग शहरों के 650 बार को बंद करने के आदेश दे दिए थे। इन डांस बारों में करीब 75 हज़ार बार बालायें अपने हुस्न और नाच को दिखाकर पुरुष ग्राहकों से पैसे पाती थी| वहीँ, करीब 1.5 लाख लोग इस धंधे में रोज़ी रोटी कमा रहे थे।
महाराष्ट्र सरकार का कहना था, मुम्बई में चलने वाले बार अपराध को बढ़ावा दे रहें है साथ ही अपराधियों को शरण भी देते है। मुम्बई पुलिस का ये भी कहना था की इन डांस बार की वजह से मानव तस्करी भी बढ़ गई थी। बहरहाल अपने लटके झटकों से पूरे भारत से मुंबई आने वाले और डांस बार में जाकर डांस देखने का शौक रखने वालों को झुमाने वाली इन बार बालाओ के ऊपर प्रसिद्द फिल्म चांदनी बार भी बन चुकी है जिसने डांस बार बालाओ के स्याह पक्ष को उजागर किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को आगे बढ़ा कर करीब 2.5 लाख लोगो को रोज़ रोटी कमाने का जरिया दे दिया है। साथ ही उन शौक़ीन लोगो के शौक को पूरा करने का एक और मौक़ा दे दिया| मुम्बई की रौनक कही जाने वाली बार बालाये अब मुम्बई की ट्रेन पकड़ने के साथ अपने पुराने दिनों में लौटने को भी बेताब होंगी ।
वजह भी साफ़ है मेलों, आर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप में काम करते हुए इन्हें अपने को समाज में विचरने वाले गिद्धों से बचाने में खासी मशक्कत करनी पड़ती थी| कम से कम डांस बार में इन्हें खुद को बचाने में जद्दोजहद का सामना नहीं करना पड़ेगा, वजह भी साफ़ है डांस बार दबंग ही चलाते है।
बार बालाओ की रेलगाड़ियों ने इनको उन जगहों पर पहुंचा दिया जहां जाने का सपना इन्होने कभी देखा नहीं होगा। मुम्बई के डांस बार की चमक दमक वाली दुनिया से मेलों में डांस ग्रुप के साथ परफार्म करना इनकी नियत बन गई। पेट की आग बुझाने के लिए इन बार बालाओं ने अपने जिस्म की नुमाइश करने में भी कोताही नहीं बरती।
2005 में डांस बार बंद होने के बाद इनके सामने रोज़ी रोटी का संकट पैदा हुआ, सरकारी फरमान ने इन हज़ारों बार बालाओं में से कुछ को जिस्म फरोशी के धंधे में भी धकेल दिया था। मुम्बई से निकाले जाने के बाद इन्होने पूर्वी भारत और उत्तरी भारत में रोज़ी रोटी कमाने के लिए रूख किया। वही कुछ कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में शिफ्ट हो गई।
अगस्त 2005 में बाम्बे पुलिस (संशोधन) एक्ट 2005 के तहत सरकार ने मुम्बई शहर के करीब 700 डांस बार और महाराष्ट्र के अलग अलग शहरों के 650 बार को बंद करने के आदेश दे दिए थे। इन डांस बारों में करीब 75 हज़ार बार बालायें अपने हुस्न और नाच को दिखाकर पुरुष ग्राहकों से पैसे पाती थी| वहीँ, करीब 1.5 लाख लोग इस धंधे में रोज़ी रोटी कमा रहे थे।
महाराष्ट्र सरकार का कहना था, मुम्बई में चलने वाले बार अपराध को बढ़ावा दे रहें है साथ ही अपराधियों को शरण भी देते है। मुम्बई पुलिस का ये भी कहना था की इन डांस बार की वजह से मानव तस्करी भी बढ़ गई थी। बहरहाल अपने लटके झटकों से पूरे भारत से मुंबई आने वाले और डांस बार में जाकर डांस देखने का शौक रखने वालों को झुमाने वाली इन बार बालाओ के ऊपर प्रसिद्द फिल्म चांदनी बार भी बन चुकी है जिसने डांस बार बालाओ के स्याह पक्ष को उजागर किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को आगे बढ़ा कर करीब 2.5 लाख लोगो को रोज़ रोटी कमाने का जरिया दे दिया है। साथ ही उन शौक़ीन लोगो के शौक को पूरा करने का एक और मौक़ा दे दिया| मुम्बई की रौनक कही जाने वाली बार बालाये अब मुम्बई की ट्रेन पकड़ने के साथ अपने पुराने दिनों में लौटने को भी बेताब होंगी ।
वजह भी साफ़ है मेलों, आर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप में काम करते हुए इन्हें अपने को समाज में विचरने वाले गिद्धों से बचाने में खासी मशक्कत करनी पड़ती थी| कम से कम डांस बार में इन्हें खुद को बचाने में जद्दोजहद का सामना नहीं करना पड़ेगा, वजह भी साफ़ है डांस बार दबंग ही चलाते है।

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